1 . हम "इलाज से बेहतर रोकथाम है", के सिद्धांत पर कार्य करते हैं। किसी भी बीमारी को ठीक करने से अधिक अच्छा है कि सावधानी बरतकर उसे होने से रोकना।
2. चिकित्सक इलाज करता है, लेकिन ठीक होना भगवान / प्रकृति की कृपा पर निर्भर है।
3. हम किसी बीमारी /रोग का इलाज करके ठीक करने का दावा नहीं करते। हम योग / प्राणायाम / आयुर्वेद / प्राकृतिक चिकित्सा / किलीजिंग थेरेपी आदि अन्य ऑल्टरनेटिव थेरेपीज की सहायता से मानव शरीर के आंतरिक अंगों का शोधन करके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता / इम्युनिटी (IMMUNITY) में वृद्धि करते हैं। इम्यूनिटी के बढ़ने से रोग स्वतः ठीक होने लगता है।
4. प्रदूषण, पैरासाइट, गलत खानपान, बिगड़ी जीवन शैली और मानसिक तनाव की वजह से शरीर के आंतरिक अंगों में टॉक्सिंस / कचरा / जहर पहुंचने से इन अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और बीमारियां होने लगती हैं
क्लींजिंग थेरेपी शरीर के आन्तरिक अँगों की सफाई करके जमा टॉक्सिंस / कचरा / जहर को शरीर से बाहर निकाल देती है। इससे आंतरिक अंग सक्रिय हो जाते हैं और उन अंगों की अवशोषण क्षमता (absorption power) बढ़ जाती है।*
तत्पश्चात *योग / प्राणायाम / आयुर्वेद / प्राकृतिक चिकित्सा / किलीजिंग थेरेपी आदि अन्य ऑल्टरनेटिव थेरेपीज की सहायता से इम्यूनिटी में वृद्धि होने लगती है और "पुरानी से पुरानी-क्रोनिक, लाइलाज़ और असाध्य बीमारियां" स्वतः ठीक होने लगती हैं। इस तकनीक से बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के विश्व में ज्ञात 90% रोगों का 100% कारगर इलाज होने की संभावना बढ़ जाती है।
5. किसी भी व्यक्ति की बीमारी का इलाज़ उसकी आयु, लिंगभेद, उसके रोग की प्रकृति (वात, पित्त व कफ), जीवन शैली, खान पान, बीमारी की गंभीरता, प्राण ऊर्जा व उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर होता है।
6. कई लोगों को एक बीमारी के साथ साथ और भी अन्य बीमारियां व स्वास्थ समस्याएं होती हैं। अतः हर व्यक्ति का इलाज एक समान नही होता।